कौन रोके हुए है हिंदी की राह?
हिंदी दिवस विशेष: भूमंडलीकृत भारत के लगातार बड़े होते बाजार के साथ विज्ञापन व मनोरंजन की दुनिया में हिंदी की तूती बोलने लगी है, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया में भी उसका जलवा है और देश के बड़े भाग में चुनाव प्रचार करने और वोट मांगने की भाषा भी वही है. लेकिन क्या किसी भाषा के भविष्य के लिए इतना ही काफ़ी है?
यह The Wire Hindi की एक रिपोर्ट का छोटा अंश है। पूरा पाठ प्रकाशक के पास रहता है — उसे वहीं पढ़ने के लिए लिंक पर जाएं।
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