लोकतंत्र की स्थिति: सत्तारूढ़ राजनीति, कटौती की राजनीति है
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल बाधित नहीं की जा रही है- विचार, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता भी संकट में है. अभिव्यक्ति की बहुलता लोकतंत्र की बहुलता का ही लक्षण होती है. उसे कुतरना लोकतंत्र को कुतरने के बराबर है.
यह The Wire Hindi की एक रिपोर्ट का छोटा अंश है। पूरा पाठ प्रकाशक के पास रहता है — उसे वहीं पढ़ने के लिए लिंक पर जाएं।
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